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हिंदी साहित्य

मुंशी प्रेमचंद

जिस प्रेम में स्वार्थ की गंध हो, वह प्रेम नहीं सौदा है। - निर्मला(1927)

Hindi Literature

मैथिलीशरण गुप्त

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करे सभी। -मनुष्यता

Hindi Poetry

साहित्य समाज का दर्पण है।

अर्थ: साहित्य समाज का आईना है। यह समाज की स्थिति, भावनाओं और विचारों को प्रतिबिंबित करता है।

Classic Literature

यह वेबपेज मेरी डिजिटल पुस्तकालय है — जहाँ मैं हिंदी साहित्य, कविता, और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के प्रति अपना प्रेम साझा करता हूँ। चाहे आप साहित्य प्रेमी हों, विद्यार्थी हों, या भाषा की सुंदरता के प्रशंसक — यहाँ हर किसी के लिए कुछ न कुछ है।

साहित्य भारतीय संस्कृति का सदैव अभिन्न अंग रहा है। हिंदी साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं है — यह हमारी विरासत, भावनाओं और पूर्वजों की अनंत बुद्धि से जुड़ने का माध्यम है। मैंने यह ब्लॉग अपनी साहित्यिक यात्रा को संजोने और उन रचनाओं को साझा करने के लिए शुरू किया है जो न केवल सुंदर हैं, बल्कि अर्थपूर्ण और प्रेरणादायक भी हैं।

साहित्य के रंग

हिंदी के रचनाकार

Poetry

महादेवी वर्मा

Novels

मुंशी प्रेमचंद

Short Stories

मैथिलीशरण गुप्त

Essays

जयशंकर प्रसाद