PKNMS Logo
हिंदी साहित्य
Home / Hindi Literature / कविताएँ / जागो प्यारे | उठो लाल अब आँखें खोलो | Utho Lal Ab Aankhain Kholo
AUTHOR Literature Expert | February 2026

जागो प्यारे - उठो लाल अब आँखें खोलो

उठो लाल, अब आँखें खोलो।
पानी लायी हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले ।
उनके ऊपर भौरे झूले।

चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अति सुन्दर ।
नभ में न्यारी लाली छायी ।
धरती ने प्यारी छवि पायी।

भोर हुआ सूरज उग आया।
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुन्दर समय न खोओ।
मेरे प्यारे अब मत सोओ।

— अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'(15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के कवि, निबन्धकार तथा सम्पादक थे। उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति के रूप में कार्य किया। वे सम्मेलन द्वारा विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किये गए थे। उन्होंने प्रिय प्रवास नामक खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य लिखा जिसे मंगलाप्रसाद पारितोषिक से सम्मानित किया गया था।

उठो लाल अब आँखें खोलो कविता – हरिऔध

Comments (0)

Leave a Comment

Loading...

Loading comments...

Disclaimer: The views and opinions expressed in this article are those of the author and do not necessarily reflect the official policy or position of Literature Magazine. Any content provided is for informational and inspirational purposes only. Readers are advised to use their discretion before relying on any information provided.