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AUTHOR Literature Expert | May 2026

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,

चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!

मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!

— माखनलाल चतुर्वेदी

माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी साहित्य के महान कवि, लेखक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई नामक स्थान में हुआ था। वे हिंदी साहित्य में राष्ट्रवादी चेतना के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में देशभक्ति, प्रकृति प्रेम, त्याग, संघर्ष और मानवता की गहरी भावना दिखाई देती है।

माखनलाल चतुर्वेदी बचपन से ही प्रतिभाशाली थे और उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद अध्यापन कार्य भी किया, लेकिन देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर वे सक्रिय रूप से आजादी की लड़ाई में शामिल हुए। उनकी लेखनी केवल साहित्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध जनजागरण का माध्यम भी बनी।

वे एक निर्भीक पत्रकार भी थे। उन्होंने “कर्मवीर”, “प्रभा” और “प्रताप” जैसे प्रसिद्ध पत्रों का संपादन किया। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और लोगों में स्वतंत्रता की भावना उत्पन्न करना था। अंग्रेज़ सरकार ने उनकी राष्ट्रवादी गतिविधियों के कारण उन्हें कई बार जेल भी भेजा, लेकिन उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया।

उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता “पुष्प की अभिलाषा” है, जिसकी पंक्तियाँ —
“मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक…”
आज भी देशभक्ति और त्याग की भावना का प्रतीक मानी जाती हैं। यह कविता विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

माखनलाल चतुर्वेदी की भाषा सरल, ओजपूर्ण और भावनात्मक थी। वे छायावाद युग के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं, लेकिन उनकी कविताओं में राष्ट्रीय चेतना विशेष रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कविता, निबंध, नाटक और पत्रकारिता के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाया।

उनकी प्रमुख कृतियों में “हिम किरीटिनी”, “हिम तरंगिणी”, “युग चरण”, “साहित्य देवता” आदि शामिल हैं। उनकी रचना “हिम तरंगिणी” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

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