लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है ।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम ।
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
सोहनलाल द्विवेदी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, लेखक और राष्ट्रभक्त साहित्यकार थे। उनका जन्म 22 फरवरी 1906 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी नामक स्थान में हुआ था। वे बचपन से ही साहित्य और देशभक्ति की भावना से प्रभावित थे। उन्होंने अपनी शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्राप्त की और आगे चलकर हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
“कोशिश करने वालों की हार नहीं होती” उनकी सबसे प्रसिद्ध प्रेरणादायक कविताओं में से एक है। इस कविता में उन्होंने निरंतर प्रयास, धैर्य और संघर्ष के महत्व को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कविता विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और जीवन में संघर्ष कर रहे लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।
सोहनलाल द्विवेदी ने कविता, गीत, बाल साहित्य और राष्ट्रभक्ति साहित्य की अनेक रचनाएँ लिखीं। उनकी प्रमुख कृतियों में “भैरवी”, “पूजागीत”, “वासवदत्ता”, “कुणाल”, “युगाधार” आदि शामिल हैं। बाल साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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