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Saturday, 27 June, 2026 | नई दिल्ली, भारत
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Your body is the most valuable gift you possess. It carries you through every experience, supports your dreams, and enables you to achieve your goals. No matter how much wealth, success, or knowledge a person gains, none of it can be fully enjoyed without good health. Taking care of your body is not just a choice —it is a responsibility.
मनुष्य के पास जो सबसे मूल्यवान संपत्ति है, वह उसका शरीर है। धन, पद, प्रतिष्ठा और अन्य सभी उपलब्धियाँ तभी सार्थक हैं जब शरीर स्वस्थ हो। यदि शरीर स्वस्थ नहीं है, तो जीवन के सुखों का आनंद लेना भी कठिन हो जाता है। इसलिए अपने शरीर की देखभाल करना केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।
Focus on doing your duty and giving your best effort. Don't be driven solely by the desire for results, and don't avoid action out of fear of the outcome.
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में कभी नहीं। इसलिए तुम कभी भी फल की इच्छा से कर्म मत करो और न ही निष्क्रियता से आसक्त हों।
श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय २, श्लोक ४७)
“ लालाजी ने फिर कहा-"मैं जानता हूं, जिसे ईश्वर ने हाथ दिए हैं, वह दूसरों का मुहताज नहीं रह सकता। इतना मूर्ख नहीं हूं, लेकिन मां-बाप की कामना तो यही होती है कि उनकी संतान को कोई कष्ट न हो। जिस तरह उन्हें मरना पड़ा, उसी तरह उनकी संतान को मरना न पड़े। जिस तरह उन्हें धक्के खाने पड़े, कर्म-अकर्म सब करने पड़े, वे कठिनाइयां उनकी संतान को न झेलनी पड़ें। दुनिया उन्हें लोभी, स्वार्थी कहती है, उनको परवाह नहीं होती, लेकिन जब अपनी ही संतान अपना अनादर करे, तब सोचो ! अभागे बाप के दिल पर क्या बीतती है? उससे मालूम होता है, सारा जीवन निष्फल हो गया। जो विशाल भवन एक-एक ईंट जोड़कर खड़ा किया था, जिसके लिए क्वार की धूप और माघ की वर्षा सब झेली, वह ढह गया और उसके ईंट-पत्थर सामने बिखरे पड़े हैं। वह घर नहीं ढह गया, वह जीवन ढह गया, संपूर्ण जीवन की कामना ढह गई। ”
कर्मभूमि ( मुंशी प्रेमचंद )